गुरुवार, 14 मई 2009

वैधव्य

मित्रों,
पुनर्विवाह वैधव्य का एक उपाय है | आप क्या सोचते हैं ? पढिये ...

बिना मुहूर्त, बिना ताम - झाम और बिना किसी गाजे - बाजे के, देर शाम एक विवाह सम्पन्न हो रहा है | शम्भुनाथ तिवारी एक मध्यमवर्गीय शिक्षक हैं | अपने सदाचार से लोकप्रिय हैं पर इस विवाह ने उन्हें सबसे दूर कर दिया है | इतना की घर के सगे भाई, बहन और अन्य करीबी रिश्तेदारों ने तक उनसे मुंह मोड़ लिया है | सारे गाँव में इस विवाह की आलोचना की जा रही है और शम्भुनाथ किसी अपराधी की तरह इसे चुपके से अपने सभी रीति - रिवाजों के विरूद्व हो, किसी यज्ञ की भाँती संपन्न किये जा रहे हैं |

दुल्हन उनकी बहु है जो शादी के १ बरस बाद विधवा हो गयी थी और पिछले ३ बरसों से वैधव्य का भार वहन करे आ रही है | उसे शम्भुनाथ अपने ही पढाये एक योग्य नौजवान के साथ ब्याह रहें हैं |

दरवाजे पर अकेले खड़े शम्भुनाथ ने सजल नेत्रों से हाथ उठा दुल्हन को बिदाई दी और टैक्सी चल दी | पास के कमरे से झाँक रही है उनकी बेटी जो पिछले ५ बरसों से वैधव्य का अभिशाप लिए अपने पिता के घर जी (?) रही है |

१४-०५-२००९

6 टिप्‍पणियां:

  1. "शम्भुनाथ तिवारी" jaise charitra wale log koyi lakho me ek hote hai, aur yase hi log aandhe aur abhre samaj ko sahi disha de sakte hai.

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  2. kahani bahut gahari hai; soch mei dubo deti hai. Agar itne hee mahan hei shambhu tho apni beti ko paanch saal thak vaidhavya mei kyu jeene diya; apne padhaye naujavan ko pehle beti ka haath kyu nahi diya? bas theen saal mei hee bahu par taras khaane lage aur 5 saal se beti nazar nahi aayee? ya fir aisa hai ki beti apni hai dekhbaal mei tho karoonga hee, lekin bahu kahaan jaayegi aisa socha? bahut sawaal khade utathe hai. pathaa nahi us beti par kya guzar rahi hai.

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  3. hum sabhi ko taarif nahi balki is yagya ka hissa banane ki koshish karni chahiye...

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  4. vaidhavya laghukatha jeevan ki kadvi sachchai hai sadhvad swikare.
    ravindra khare,unitedbank,m.p.nagar,bhopal.

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  5. behad maarmik rachana hai | itane kam shabdon me tez dhaar kaabile taareef hai .

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